
बिहार की सियासत में ‘महागठबंधन’ के भविष्य को लेकर एक बार फिर अटकलें तेज हो गई हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता और विधायक दल के नेता शकील अहमद खान के हालिया बयान ने विपक्षी एकता की नींव हिला दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिहार में अब महागठबंधन का वजूद लगभग खत्म हो चुका है और कांग्रेस को अपनी राजनीतिक पहचान बचाने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का साथ छोड़कर अकेले आगे बढ़ना चाहिए।
‘कांग्रेस के लिए बोझ बना गठबंधन’
शकील अहमद खान ने राजद के साथ गठबंधन को कांग्रेस के लिए नुकसानदेह बताया है। उनका तर्क है कि राजद के साथ रहने से कांग्रेस को न तो संगठनात्मक मजबूती मिल रही है और न ही चुनावी स्तर पर कोई बड़ा लाभ हो रहा है। उन्होंने कहा, “जब गठबंधन से पार्टी की विचारधारा और जनाधार को ही खतरा पहुंचने लगे, तो उसे ढोने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।” उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार कांग्रेस के अधिकांश कार्यकर्ता और नेता अब आलाकमान से यह मांग कर रहे हैं कि पार्टी आगामी चुनाव अपने दम पर लड़े।
तेजस्वी यादव की सक्रियता पर उठाए गंभीर सवाल
शकील अहमद ने केवल गठबंधन ही नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की कार्यशैली पर भी तीखा प्रहार किया है। तेजस्वी की हालिया विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब बिहार बेरोजगारी, महंगाई और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर संकटों से जूझ रहा है, तब नेता प्रतिपक्ष का राज्य से बाहर रहना जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता से उम्मीद की जाती है कि वे सड़क पर उतरकर सरकार को घेरें, लेकिन इस भूमिका में बड़ी कमी दिखाई दे रही है।”
विपक्ष की कमजोरी का सत्ता पक्ष को लाभ
कांग्रेस नेता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि विपक्ष की इस सुस्ती और कमजोर भूमिका का सीधा फायदा एनडीए (NDA) और सत्ताधारी दलों को मिल रहा है। उन्होंने इशारा किया कि तेजस्वी यादव को विदेश यात्रा पर जाने से पहले जनता के ज्वलंत मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।
क्या टूटेगा दशकों पुराना साथ?
शकील अहमद खान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस अकेले चलने का फैसला लेती है, तो बिहार का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा। फिलहाल राजद की ओर से इस पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन शकील अहमद के इस रुख ने गठबंधन की दरारों को सार्वजनिक कर दिया है।

