
बिहार में नीतीश कुमार की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने मंत्री पद की शपथ ली। विधान परिषद (MLC) कोटे से वे लगातार दूसरी बार बिहार सरकार में मंत्री बने हैं, जो संगठन और केंद्रीय नेतृत्व में उनके मजबूत प्रभाव को दर्शाता है।
केंद्रीय नेतृत्व के करीबी, संगठन में लंबा अनुभव
लगभग 63 वर्षीय डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का बेहद करीबी माना जाता है। उनका पार्टी संगठन में एक लंबा और प्रतिष्ठित कार्यकाल रहा है। वह 22 वर्षों से अधिक समय तक बिहार भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष के पद पर आसीन रहे, जो उनकी वित्तीय और संगठनात्मक दक्षता को प्रमाणित करता है। वर्तमान में वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा, उन्हें सिक्किम राज्य का प्रभारी भी बनाया गया है।
एमएलसी से मंत्री तक का सफर
डॉ. जायसवाल राजनीति में बहुत समय से सक्रिय हैं, जिसकी शुरुआत उन्होंने मुख्य रूप से एक सामाजिक कार्यकर्त्ता के तौर पर की थी।
विधान परिषद: वह पहली बार 2009 में पूर्णिया, अररिया व किशनगंज के स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य (MLC) चुने गए थे।
लगातार तीसरी बार MLC: 2009 से लेकर अब तक, वह लगातार तीन बार बिहार विधान परिषद के सदस्य चुने जा चुके हैं, तीसरी बार वे 2022 में चुने गए थे और वर्तमान में इसी पद पर हैं।
पूर्व मंत्री: विधान परिषद के सदस्य चुने जाने के बाद, उन्हें पिछली नीतीश कुमार सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री बनाया गया था, हालाँकि बाद में उन्होंने इस पद से त्यागपत्र दे दिया था।
उच्च शिक्षा और सामाजिक पहचान
डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल का जन्म 3 दिसंबर 1963 को बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी में हुआ था। वह अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) की कलवार जाति से आते हैं। उनकी शिक्षा का स्तर बेहद उच्च है; उन्होंने एम.एससी., एमबीए, पीएच.डी. और एम.फिल. की डिग्रियां प्राप्त की हैं। उन्होंने वर्ष 1998 में बीएनएम विश्वविद्यालय, मधेपुरा से पीएच.डी. की उपाधि हासिल की।
वह माता गुजरी विश्वविद्यालय से संबद्ध किशनगंज स्थित माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के प्रबंध निदेशक हैं। इसके अलावा, वह वनवासी कल्याण, किशनगंज के अध्यक्ष भी हैं, जो समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
केंद्र की राजनीति में प्रयास
डॉ. जायसवाल ने केंद्र की राजनीति में भी अपनी भागीदारी निभाने का प्रयास किया था। उन्होंने 2014 में बिहार के किशनगंज लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें कांग्रेस के मोहम्मद असरारुल हक से पराजय मिली थी।
उन्हें उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए कई सम्मान भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें बिहार के राज्यपाल द्वारा एक अच्छे समाजसेवी के तौर पर सम्मान और रेलवे बोर्ड की ओर से 39 लोगों की दुर्घटना में जीवन बचाने के लिए मिला अवॉर्ड शामिल है।