बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकारी अध्यक्ष अशोक राम ने कांग्रेस का साथ छोड़कर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का दामन थाम लिया है। छह बार विधायक रह चुके अशोक राम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद आज जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनका जदयू में शामिल होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर मिथिलांचल क्षेत्र में, जहां वे एक प्रमुख दलित चेहरा हैं।

अशोक राम ने अपने इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि आज बिहार को नीतीश कुमार की आवश्यकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा किए गए विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जनता भी यही चाहती है कि नीतीश कुमार ही राज्य का नेतृत्व करें। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार ने बिहार में विकास किया है और जनता कह रही है कि नीतीश कुमार ही चाहिए, इसीलिए मैंने जदयू ज्वाइन करने का निर्णय लिया है।”
कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और एक कद्दावर दलित नेता का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए एक बड़ी क्षति है। बिहार में कांग्रेस पहले से ही कमजोर स्थिति में है और ऐसे में एक बड़े चेहरे का जाना पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा सकता है। अशोक राम के जदयू में शामिल होने से मिथिलांचल के दलित वोट बैंक में सेंध लग सकती है, जिसका सीधा फायदा जदयू को मिल सकता है।
कांग्रेस के लिए यह खबर ऐसे समय में आई है जब वह आगामी चुनावों की तैयारियों में जुटी है। एक वरिष्ठ नेता और कार्यकारी अध्यक्ष का पार्टी छोड़ना न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराएगा, बल्कि पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
